कौशाम्बी: चायल विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय सुधवर में छात्र की मृत्यु के बाद विद्यालय के समस्त स्टाफ के निलंबन का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए शिक्षकों के निलंबन को तत्काल वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि बिना विस्तृत जांच के की गई कार्रवाई एकतरफा है और इससे बेसिक शिक्षकों की छवि प्रभावित हुई है।
महासंघ के जिला संयोजक ओम दत्त त्रिपाठी ने गुरुवार को बताया कि 29 जुलाई को ग्रामीणों द्वारा विद्यालय परिसर में छात्र का शव रखकर प्रदर्शन किए जाने के बाद प्रशासन ने पूरे विद्यालय स्टाफ को निलंबित कर दिया था। उन्होंने कहा कि अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्र के शरीर पर किसी भी प्रकार की बाहरी चोट नहीं पाई गई है तथा मृत्यु का कारण निमोनिया से उत्पन्न चिकित्सीय जटिलता बताया गया है।
उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले शिक्षकों को लापरवाह एवं संवेदनहीन मानते हुए की गई कार्रवाई उचित नहीं है। इससे न केवल संबंधित शिक्षकों का मनोबल प्रभावित हुआ है, बल्कि बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की छवि पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। उनका कहना था कि यदि बिना तथ्यों की पुष्टि के इस प्रकार कार्रवाई की परंपरा जारी रही तो भविष्य में भी निर्दोष शिक्षक अनावश्यक रूप से परेशान होंगे।
महासंघ के जिला सहसंयोजक अवनीश मिश्र ने भी निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि संगठन किसी भी दोषी को संरक्षण देने के पक्ष में नहीं है, लेकिन कार्रवाई तथ्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षकों का निलंबन समाप्त करने की मांग दोहराई।
महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि इस प्रकरण को लेकर संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल 31 जुलाई को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से मुलाकात करेगा। इस दौरान शिक्षकों का निलंबन समाप्त करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराए जाने की मांग संबंधी ज्ञापन सौंपा जाएगा।
