कौशांबी: विद्यालयी बालिकाओं के स्वास्थ्य, गरिमा, सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार को ध्यान में रखते हुए रविवार को मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) विषय पर आनलाइन उन्मुखीकरण बैठक आयोजित की गई। बैठक की मेजबानी व संचालन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका शालिनी कुशवाहा ने किया। इसमें बीएसए डा. कमलेंद्र कुमार कुशवाहा, सभी खंड शिक्षा अधिकारी, एआरपी, प्रधानाध्यापक, शिक्षक, राज्य सलाहकार-जेंडर इक्विटी सरिता सिंह, बालिका शिक्षा समन्वयक योगेश तिवारी सहित अधिकारी व संदर्भदाता जुड़े।
बैठक में डा. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार व अन्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन की व्यापक अवधारणा पर चर्चा की गई। बताया गया कि एमएचएम केवल सैनिटरी पैड के वितरण तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत विद्यालयों में स्वच्छ व सुरक्षित शौचालय, पानी, साबुन, मासिक धर्म में उपयोग होने वाली सामग्री, उसके सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था, जागरूकता और शिक्षकों में संवेदनशीलता और छात्राओं को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना भी शामिल है।
बीएसए डा. कमलेंद्र कुमार कुशवाहा ने कहा कि मासिक धर्म स्वच्छता केवल बालिकाओं से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि विद्यालय की संवेदनशीलता और सामूहिक जिम्मेदारी है। केवल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। विद्यालयों में आवश्यक सभी सुविधाएं प्रभावी रूप से उपलब्ध हों और कोई भी बालिका मासिक धर्म के कारण पढ़ाई या विद्यालयी गतिविधियों से वंचित न हो। शासन व सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करना सभी की जिम्मेदारी है।
लखनऊ की मास्टर ट्रेनर प्रियंका सक्सेना ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से एमएचएम से संबंधित विभिन्न बिंदुओं की जानकारी दी। संदर्भदाता नीलिमा बुंदेली, ऋचा चौधरी, अनुराधा पांडेय, अनिल मानव और शिव बहादुर ने भी सहभागिता की। बैठक में प्रत्येक विद्यालय को सुरक्षित, समावेशी, संवेदनशील और माहवारी अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में संदेश दिया गया कि माहवारी प्राकृतिक प्रक्रिया है, शर्म का विषय नहीं। स्वच्छता आवश्यकता है और शिक्षा प्रत्येक बालिका का अधिकार है।
