कौशाम्बी : नेवादा के उच्च प्राथमिक विद्यालय पेरई में ईको क्लब टीम के बच्चों ने किताबों से बाहर निकलकर मिट्टी में सेहत का पाठ तलाशा। विद्यालय परिसर में किचन गार्डन तैयार कर बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण, पोषण और जैविक खेती की जानकारी व्यवहारिक रूप से हासिल की। लर्निंग बाय डूइंग लैब के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई सामग्री की मदद से बच्चों ने क्यारियां तैयार कीं। इसके बाद पालक, धनिया, टमाटर, बैंगन और मिर्च समेत अपनी पसंद की सब्जियों के बीज बोए। गतिविधि में बच्चों ने उत्साह के साथ सहभागिता की।
ईको क्लब प्रभारी व ग्रीन शिक्षक हरिओम सिंह की अगुवाई में बच्चों को चार समूहों में बांटा गया। प्रत्येक समूह को अलग-अलग क्यारी की जिम्मेदारी सौंपी गई। बच्चों ने समूह के साथ मिलकर क्यारियों की मिट्टी तैयार की और निर्धारित स्थान पर सब्जियों के बीज बोए। इस दौरान बच्चों ने खेती की प्रक्रिया को नजदीक से समझा। बुआई के साथ उन्हें पौधों की देखभाल, सिंचाई और संरक्षण के बारे में भी जानकारी दी गई।
राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षक हरिओम सिंह ने बच्चों को किचन गार्डन में लगाई गई सब्जियों से मिलने वाले पोषक तत्वों और उनके स्वास्थ्य लाभ की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हरी सब्जियां संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बच्चों को जैविक खेती के फायदे बताते हुए रासायनिक पदार्थों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले नुकसान के प्रति भी जागरूक किया गया। इस तरह बच्चों ने मिट्टी में बीज बोने के साथ स्वस्थ जीवन के लिए पौष्टिक भोजन के महत्व को भी समझा।
शिक्षिक चक्रपाणि मिश्र ने बताया कि किचन गार्डन का उद्देश्य बच्चों को प्रकृति और खेती से जोड़ने के साथ उनमें श्रम के प्रति सम्मान, जिम्मेदारी और पोषण संबंधी समझ विकसित करना है। बच्चे स्वयं बीज बोकर पौधों की देखभाल करेंगे, जिससे उन्हें खेती की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने बताया कि विद्यालय में तैयार होने वाली सब्जियों का उपयोग मध्याह्न भोजन में भी किया जाएगा। इससे बच्चों को ताजी सब्जियों के महत्व को समझने के साथ पौष्टिक भोजन प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
शासन की पहल के अनुरूप विद्यालय में किचन गार्डन विकसित किया गया है। इसके माध्यम से बच्चों को किताबों में पढ़ाए जाने वाले पर्यावरण, खेती और पोषण संबंधी विषयों को व्यवहारिक रूप से सीखने का अवसर मिल रहा है। ईको क्लब की इस गतिविधि से विद्यालय परिसर में हरियाली बढ़ाने के साथ बच्चों में प्रकृति, जैविक खेती और स्वस्थ खान-पान के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया गया।
