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ईसीसीई प्रशिक्षण से बदलेगी प्रारंभिक शिक्षा की तस्वीर, कौशाम्बी के पांच शिक्षक बने बदलाव के वाहक

स्तरीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण में मिली नई सीख, प्रशिक्षण के बाद जिले के शिक्षक व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता होंगे प्रशिक्षित

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कौशाम्बी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) को मजबूत बनाने के उद्देश्य से 20 से 24 जुलाई तक राज्य स्तरीय ईसीसीई कोर ग्रुप/मास्टर ट्रेनर का पांच दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण में कौशाम्बी जनपद से पांच प्रतिनिधि प्रतिभाग कर रहे हैं, जो प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद जिले में ईसीसीई के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे जनपद की पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

प्रशिक्षण के प्रथम दिवस प्रतिभागियों के परिचय एवं सहजता बढ़ाने वाली गतिविधियों के बाद विभिन्न शैक्षणिक सत्रों का शुभारंभ हुआ। विशेषज्ञों ने बालक के सर्वांगीण विकास, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की पाठ्यचर्या, उत्तर प्रदेश में ईसीसीई के तहत किए जा रहे प्रयास, क्रियाशील बालवाटिका, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा से संबंधित शासनादेश, जनपद स्तर पर ईसीसीई रिसोर्स सेंटर की आवश्यकता, बालवाटिका से जुड़े आंकड़ों की समझ, निपुण भारत मिशन के लक्ष्य तथा किताब वितरण ऐप के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान प्रतिभागियों ने प्रश्नोत्तर एवं चर्चा-परिचर्चा के माध्यम से अपने अनुभव भी साझा किए।

मंगलवार को अपर शिक्षा निदेशक पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रशिक्षण में पहुंचकर प्रदेश के 25 जनपदों से आए शिक्षकों एवं मास्टर ट्रेनरों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा ही बच्चे के संपूर्ण भविष्य की मजबूत नींव है। खेल आधारित, गतिविधि आधारित एवं बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धति को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने शिक्षकों से नवीन भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का भी आह्वान किया।

प्रशिक्षण के दौरान वंडर बॉक्स, जादुई पिटारा, प्रिंट समृद्ध शिक्षण वातावरण, लर्निंग कॉर्नर, ईसीसीई एजुकेटर की भूमिका, विद्याप्रवेश कार्यक्रम की दक्षताएं, ईसीसीई केंद्रों की मैपिंग तथा मासिक समीक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही इन सभी बिंदुओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर की कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श किया गया।

कौशाम्बी से डॉ. ओमप्रकाश सिंह (नोडल एसआरजी प्री-प्राइमरी), धर्मनाथ (जिला समन्वयक प्रशिक्षण), धीरज कुमार (नोडल डायट मेंटर), नरेश कुमार (एआरपी) तथा अनूप मोहन (शिक्षक संकुल) प्रशिक्षण में प्रतिभाग कर रहे हैं। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद यह टीम जिले के शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करेगी, जिससे ईसीसीई की अवधारणा गांव-गांव तक पहुंचेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रशिक्षण से कौशाम्बी में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को नई दिशा मिलेगी। आंगनबाड़ी केंद्रों एवं बालवाटिकाओं में खेल-आधारित शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बच्चों का शारीरिक, मानसिक, भाषाई एवं सामाजिक विकास अधिक प्रभावी होगा। साथ ही सरकारी विद्यालयों में नामांकन एवं उपस्थिति बढ़ाने, ड्रॉपआउट दर कम करने तथा निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रशिक्षण के बाद जिले में इसका चरणबद्ध क्रियान्वयन किया जाएगा, जिससे बुनियादी शिक्षा व्यवस्था और अधिक गुणवत्तापूर्ण एवं बाल-केंद्रित बन सकेगी।