कौशाम्बी: परिषदीय विद्यालयों में बालवाटिका के नौनिहालों को गुणवत्तापूर्ण व आनंददायी अधिगम उपलब्ध कराने के लिए शासन से उपलब्ध कराई गई पुस्तकों के वितरण की आनलाइन प्रविष्टि अनिवार्य कर दी गई है। ‘चहक-1, चहक-2, चहक-3, कदम व कलांकुर’ पुस्तकों के वितरण को किताब वितरण एप पर शत-प्रतिशत स्कैन कर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला समन्वयक प्रशिक्षण धर्मनाथ ने बताया कि ब्लाकवार प्रगति की समीक्षा में नेवादा 92 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है। चायल और कौशांबी में 91-91 प्रतिशत पुस्तकों की स्कैनिंग व वितरण दर्ज किया गया है। वहीं कड़ा, मंझनपुर, मूरतगंज, सरसवां व सिराथू में अभी अपेक्षित प्रगति दर्ज किया जाना शेष है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. कमलेंद्र कुमार कुशवाहा ने निर्देश दिए कि पुस्तकों का केवल भौतिक वितरण पूरा करना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक विद्यालय में उपलब्ध पुस्तकों का मिलान करते हुए विद्यार्थियों तक पुस्तकों की पहुंच सुनिश्चित की जाए और किताब वितरण एप पर शत-प्रतिशत स्कैनिंग व आनलाइन प्रविष्टि कराई जाए। कम प्रगति वाले विकासखंडों में खंड शिक्षा अधिकारी विद्यालयवार समीक्षा कर लंबित कार्य शीघ्र पूरा कराएं।
नोडल एसआरजी डा. ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि बालवाटिका में ‘चहक’, ‘कदम’ और ‘कलांकुर’ पुस्तकों व 12 पोस्टर के माध्यम से बच्चों में भाषा, संज्ञानात्मक विकास, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य है कि कोई भी नौनिहाल पुस्तकीय संसाधनों से वंचित न रहे।
बीएसए ने डीसी व एआरपी के माध्यम से ब्लाकवार प्रगति की निरंतर समीक्षा करने के निर्देश दिए। नेवादा की 92 व चायल और कौशांबी की 91 प्रतिशत प्रगति को प्रेरक बताते हुए शेष विकासखंडों से भी इसी गति से लक्ष्य पूरा करने की अपेक्षा की गई है।