कौशाम्बी : जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), मंझनपुर में गुरुवार को आनंदम व अरुणोदय (बैगलेस) प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को आनंददायक, रचनात्मक, सहभागितापूर्ण और गतिविधि आधारित बनाना है।
प्रशिक्षण में शिक्षकों को ऐसी गतिविधियों से परिचित कराया जा रहा है, जिनके माध्यम से बच्चों की रचनात्मकता, कल्पनाशीलता, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सहयोग की भावना और विभिन्न कौशलों का विकास किया जा सके। शिक्षकों को इस बात पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि पढ़ाई केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों को करके सीखने और अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने के पर्याप्त अवसर मिलें।
प्रशिक्षण के दौरान डूडल आर्ट, कठपुतली निर्माण व प्रदर्शन, मिट्टी से कलाकृतियां बनाने के साथ ही क्राफ्ट और डिजाइन जैसी रचनात्मक गतिविधियों का अभ्यास कराया जा रहा है। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में कला-बोध, सृजनात्मक चिंतन, समस्या समाधान, अभिव्यक्ति और कल्पनाशीलता विकसित करने के तरीकों पर चर्चा की जा रही है।
प्रशिक्षण में विद्यार्थी नेतृत्व, सक्रिय सहभागिता, गतिविधि आधारित शिक्षण, समावेशी सहभागिता और कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों समेत प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी रुचि, क्षमता और आवश्यकता के अनुरूप सीखने का समान अवसर देने पर जोर दिया गया।
प्रशिक्षकों ने कहा कि प्रत्येक बच्चा अपनी अलग प्रतिभा और क्षमता लेकर आता है। उसे उचित वातावरण, प्रोत्साहन और अवसर मिले तो वह अपनी क्षमताओं का बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। आनंदम और अरुणोदय प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यालयों में ऐसा भयमुक्त और आनंदपूर्ण वातावरण तैयार करना है, जहां बच्चे उत्साह के साथ सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनें।
दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन प्राचार्य व उप शिक्षा निदेशक निधि शुक्ला के निर्देशन व वरिष्ठ प्रवक्ता अनूप कुमार की अगुवाई किया जा रहा है।
प्रशिक्षण की नोडल प्रवक्ता डा. अनामिका सिंह और शबनम सिद्दीकी हैं। उनके समन्वय में प्रशिक्षण की विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। डायट का यह प्रयास शिक्षकों को नवाचारी शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने के साथ विद्यालयों में बाल-केंद्रित, समावेशी और प्रभावी शिक्षण वातावरण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
